Lewis Acid And Bases Concept or Theory लुईस अम्ल व क्षार की अवधारणा In Hindi

Lewis's concept/theory लुईस की अवधारणा :-

संयोजकता के इलेक्ट्रॉनिक सिद्धान्त के आधार पर जी ॰ एन॰ लुईस (G.N.Lewis) नामक Scientist ने सन् 1923 मेँ  अम्ल तथा क्षार की नई व्यापक धारणा की , जिसे इलेक्ट्रॉन दाता ग्राही सिद्धान का नाम दिया गया । इस सिद्धान्त के अनुसार -

1. लुईस अम्ल (Lewis Acid) :-

वे पदार्थ/अणु जो किसी रासायनिक अभिक्रिया मेँ एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair o electron) ग्रहण कर उप-सहसंयोजक बन्ध Co-ordinate bond बनाते हैं । लुईस अम्ल कहलाते हैं । और इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही Electron pair acceptor को भी लुईस अम्ल कहते हैँ ।

उदाहरण :-

बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड (BF3) , अमोनिया (NH3) से एक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करके बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड अमोनिया यौगिक बनाता है -

यहाँ BF3 एक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण (Accept) करता है , अतः BF3 लुईस अम्ल है ।

लुईस अम्लोँ का वर्गीकरण (Classification of lewis acids ) :-

लुईस अम्लोँ का वर्गीकरण निम्न प्रकार है -

A. वे अणु जिनके केन्द्रीय परमाणु का अष्ठक पूर्ण नहीँ होता है .
B. वे अणु जिनके केन्द्रीय परमाणु मेँ रिक्त d-कक्षक होते हैँ . 
C. धनावेशित आयन 

A. वे अणु जिनके केन्द्रीय परमाणु का अष्ठक पूर्ण नहीँ होता है :- 

इस वर्ग मेँ वे यौगिक आते हैँ , जिनके केन्द्रीय परमाणु को अपना अष्ठक पूर्ण करने के लिए एक (1) या एक से अधिक इलेक्टॉन युग्मोँ की आवश्यकता होती है । 

उदाहरण :- BF3 , SO3, AlCl3, BaCl2, FeCl3, ZnCl2 आदि ।

B. वे अणु जिनके केन्द्रीय परमाणु मेँ रिक्त d-कक्षक होते हैँ :-

वे यौगिक जिनके केन्द्रीय परमाणु मेँ रिक्त d-आर्बिटल होते हैँ तथा ये लुईस क्षार से इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करके co-ordinate bond बना लेते हैँ ।

उदाहरण:- SF6, SeF4, SnCl4, PCl5,TiCl4 आदि ।

C. धनावेसित आयन Positive ions :-

सभी धनायनोँ के पास electron की कमी होने के कारण ये lewis acid की तरह व्यवहार ( behaviour) करते हैँ ।

उदाहरण :- Ag+ , Cu2+ , NH4+ , Cl-, Br+ , I+, H3O+ , NO2+ आदि ।

2. लुईस क्षार (Lewis's Base) :-

वे पदार्थ जो रासायनिक अभिक्रिया मेँ इलेक्ट्रॉन युग्म त्याग (electron pair donate ) कर सकते हैँ , लुईस क्षार Lewis's acid कहलाते हैँ । और इलेक्ट्रॉन युग्म दाता electron pair donor को लुईस क्षार  कहते हैं |


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इस अभिक्रिया मेँ NH3 एक इलेक्ट्रॉन युग्म H+ का त्याग करता है , अतः NH3 लुईस क्षार है ।

लुईस क्षार का वर्गीकरण (Classification Of Lewis's Bases) :-

A. वे परमाणु जिनके किसी एक परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है .
B. ऋणावेशित आयन

A. वे उदासीन परमाणु जिनके किसी एक परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है :-

जिस अणु के पास या एक से अधिक एकाकी electron युग्म होता है , तथा वे इलेक्ट्रॉन युग्म दाता (electron pair donor ) का कार्य करते हैँ , अर्थात् वे लुईस क्षार की भांति व्यवहार करते हैँ ।
उदाहरण :-

(1)     H          (2)
           |            ••
    H—N :      R O H
           |            ••
          H         प्राथमिक
   (अमोनिया)     ऐल्कोहल

              ••
(3)   R —O— R
              ••
           ईथर


B. ऋणावेशित आयन (Negative ion ) :-

सभी ऋणायनोँ पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होते है तथा वे Lewis अम्ल को donate कर सकते हैँ ।

उदाहरण :- Cl- , I- , Br- , OH- , CN-  आदि ।

अम्लोँ तथा क्षारोँ की शक्ति या प्रबलता (strength of acids and bases) :-

अम्लोँ की प्रबलता (strength of acids) :-

किसी अम्ल को शक्ति या प्रबलता उसकी प्रोटॉन (H+) त्याग्ने की प्रवृति पर निर्भर करती है । समान ताप व तनुता पर जो अम्ल वियोजित होकर जितने अधिक Hydrogen ion (H+ ) उदाहरण : N/10 -HCl का वियोजन 92% , N/10 -CH3COOH का वियोजन 1.3% , इत्यादि । इसी कारण HCl अम्ल ,  CH3COOH तथा H2CO3 की अपेक्षा अधिक प्रबल होता है ।
कुछ अम्लोँ की प्रबलता का क्रम निम्न प्रकार है -

A. HI>HBr>HCl>HF

B. HCl >HNO3 > H2SO4 > HCl > CH3COOH > H2CO3 > NH4+

2. क्षारोँ की प्रबलता (strength of bases ) :-

किसी क्षार की शक्ति या प्रबलता उसके प्रोटॉन ग्रहण करने की क्षमता पर निर्भर करती है । समान ताप व समान तनुता पर जो क्षार जितने अधिक OH- आयन उत्पन्न करता है , वह उतना ही अधिक प्रबल होता है ।
उदाहरण :-

N/10 -NaOH का वियोजन 84% N/10 -NH4OH का वियोजन 1.3% होता है । अतः NaOH , NH4OH , की तुलना मेँ अधिक प्रबल क्षारक है । कुछ क्षारकोँ की घटती हुई प्रबलता का क्रम निम्न है -

A. KOH > NaOH > NH4OH > B(aOH)2

B. NaoH > NH4OH > NH3 > H2O

 इस अध्याय के अन्य टॉपिक नीचे पढ़ें :
 Chapter :- विद्युत अपघटनी वियोजन का सिद्धान्त एवं आयनिक साम्य


Lewis Acid And Bases Concept or Theory लुईस अम्ल व क्षार की अवधारणा In Hindi Lewis Acid And Bases Concept or Theory लुईस अम्ल व क्षार की अवधारणा In Hindi Reviewed by suresh kumar gautam on March 02, 2017 Rating: 5

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