Indicators सूचक क्या होते हैं In Hindi

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Indicators  सूचक  क्या  होते  हैं ?


सूचक  वे  पदार्थ  होते  हैं  , जिनको  आयतनात्मक  विश्लेषण  (Volumetric  analysis)  में  किसी  रासायनिक  अभिक्रिया  के  पूर्ण  होने  की  सूचना  अन्त  बिन्दु  ( end  point )  से  प्राप्त  होती  हैं  । 

सूचक के प्रकार (Types of indicators) :-


सूचक  विभिन्न  प्रकार  के  होते  हैं  ।  इनमें  मुख्य  अम्ल  -  क्षार  सूचक  होते  हैं  ।  इन  सूचकों  का  अम्लीय  तथा  क्षारीय  विलयनों  में  भिन्न  -  भिन्न  रंग  होते  हैं  ।  अतः  किसी  विलयन में  किसी  उपयुक्त  सूचक  को  डालकर  उस  सूचक  के  द्रारा  प्रदर्शित  रंग  का  अवलोकन  करने  से  विलयन  की  अम्लीयता   ( Acidity )  ,  क्षारीयता   ( Basicity )  या उदासीनता  ( Neutrality ) की  जानकारी  प्राप्त  की जा  सकती  है  ,  अर्थात्  किसी  विलयन  के  pH  मूल्य  को  आसानी  से  निर्धारित  कर  सकते  हैं  ।  अतः  , 

अम्ल  -  क्षार  सूचक  वह  पदार्थ  हैं  ,  जिसका  अम्लीय  विलयन  में  एक  रंग  होता  है  तथा  क्षारीय  विलयन  में  इससे  भिन्न  रंग  होता  है  ।  अर्थात्  इसका  रंग  pH  मूल्य  बदलने  के  साथ  बदलता  है  ।

( A  acid  base  indicator  is  a  substance  which  has  one  colour  in acid  solution  and  togather  different  colour  in  alkaline  solution  ,  i.e.  ,  its  colour  changes  with  changing  pH  ) .

            या

वे  पदार्थ  जो  किसी  रासायनिक  अभिक्रिया  के  अन्तिम  बिन्दु  की  सूचना  रंग  परिवर्तन  के   द्रारा  देते  हैं  ।  सूचक  कहलाते  हैं  ।

सूचक का सिद्धान्त ( Principle of Indicator) :-

सूचक  के  अम्लीय  से  क्षारीय  माध्यम  में  परिवर्तित  होने  पर  रंग  परिवर्तन  की  व्याख्या  निम्न  सिद्धान्तों  के  आधार  पर  करते  हैं  -

1.  ओस्टवाल्ड  का  सिद्धान्त  ( Ostwald  Theory  ) 
2.  क्विनोनॉइड  सिद्धान्त  ( Quinonoid  Theory )

1. ओस्टवाल्ड  क  सिद्धान्त  ( Ostwald  Theory ) :-


ओस्टवाल्ड  के  अनुसार  ,  
अम्ल  -  क्षार  सूचक  दुर्बल  विद्युत अपघट्य होते  हैं  तथा  इनके  आयनों  के  रंग  भिन्न  -  भिन्न  होते  हैं  ।  फिनॉल्फ्थेलीन  सूचक  ( Phenolphthaline  indicator )  को  HPh  द्वारा  प्रदर्शित  करते  हैं  तथा  इसका  pH  परिवर्तन  8.5 - 10  होता  है  ।  रंगहीन  फिनॉल्फ्थेलीन  आयनित  होकर  रंगहीन  H+  तथा  Ph  गुलाबी  रंग  के  आयन  बनाते  हैं  ।

उदाहरण :-


HPh  -->   H+    +   Ph-

रंगहीन   (रंगहीन)   ( गुलाबी
                            रंग) 

जब  फिनॉल्फ्थेलीन  में  क्षार  मिलाना  शुरु  करते  हैं  तब  क्षार  से  प्राप्त  OH-  आयन  फिनॉल्फ्थेलीन  से  प्राप्त  H+  आयन  के  साथ  अभिक्रिया  करके  अल्प  आयनित  जल  के  अणु  बना  देते  हैं  ।  अतः   H+   आयन  की  अधिकता  में  विलयन  रंगहीन  रहता  है  परन्तु  H+  आयन  के  समाप्त  होने  पर  HPh  का  आयनन  बढ़  जाता  है  और   Ph-  आयनों  की  उपस्थिति  के  कारण  विलयन  का  रंग  परिवर्तित  होता  है  ।

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2. क्विनोनॉइड  सिद्धान्त (Quinonoid Theory) :-


अम्ल - क्षार  अनुमापन  ( Acid - Base  Titration )  में  प्रयोग  सूचक  ऐरोमैटिक  कार्बनिक  यौगिक  होते  हैं  ।  इनके  दो  चलावयवी  रुप  बेन्जीनॉयड तथा  क्विनोनॉइड होते  हैं ।  इनमें  क्विनोनॉइड  का  रंग  बेन्जीनॉयड  से  गहरे  रंग  का  होता  है ।  विलयन  के   pH  मान  बदलने  पर  बेन्जीनॉयड  व  क्विनोनॉइड  में  परिवर्तन  हो  जाता  है ।  अम्लीय  माध्यम  में  बेन्जीनॉयड  का  रंग  बहुत  हल्का  तथा क्विनोनॉइड  का  रंग  गहरा  होता  है  ।


अम्ल तथा क्षार का अनुमापन ( Acid - Base Titration) :-


1.  प्रबल  अम्ल  तथा  प्रबल  क्षार   से  अनुमापन

2.  प्रबल  अम्ल  तथा  दुर्बल  क्षार  से  अनुमापन

3.  दुर्बल  अम्ल  तथा  प्रबल  क्षार  से  अनुमापन

4.  दुर्बल  अम्ल  तथा  दुर्बल  क्षार  से  अनुमापन

(1.) प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षार से अनुमापन (Titration of Strong Acid and Strong Base) :-


प्रबल  अम्ल  तथा  प्रबल  क्षार  से  अनुमापन  (Titration  of  Strong  Acid  and  Strong  Base )  में  अन्तिम बिन्दु  पर  pH  परिवर्तन का  मान  3.5 - 10.5  तक  होता  है ,  अर्थात्  कोई  भी  सूचक  जिसका  रंग  परिवर्तन  का  मान  3.5 - 10.5  pH  range  के  बीच  होता  है .  उसका  प्रयोग  प्रबल  अम्ल  तथा  क्षार  के  अनुमापन  के  लिए  करते  हैं .  उदासीनीकरण  के  बाद  विलयन  उदसीन  रहता  है  अर्थात्  इसमें  प्रयोग  होने  वाले  सूचक  phenolphthalin , methyl  red  or  litmus ,  आदि  होते  हैं .

(2.) प्रबल अम्ल तथा दुर्बल क्षार से अनुमापन (Titration of Strong Acid and Weak Base) :-


 प्रबल  अम्ल  तथा  दुर्बल  क्षार  से  अनुमापन  ( Titration  of  Strong  Acid  and  Weak  Base ) में  अन्तिम  बिन्दु  पर  pH  परिवर्तन  का मान  3.5 - 7.5 तक  होता  है .  इस  अनुमापन  में  Litmus , methyl  orange  तथा  Methyl  red  आदि  सूचकों  का उपयोग  किया  जाता  है .  उदासीनीकरण  पर  विलयन  अम्लीय  होता  है .

( 3.) दुर्बल अम्ल तथा प्रबल क्षार से अनुमापन (Titration of Weak Acid  and Strong Base) :-


 प्रबल  अम्ल  तथा  प्रबल  क्षार  से  अनुमापन  में  अन्तिम  बिन्दु  पर  pH  परिवर्तन  का  मान 6.5 - 10  तक  होता  है .  इस  अनुमापन  में  Phenolphthaline  तथा  phenol  red  आदि  सूचकों  का  उपयोग  किया  जाता  है .  उदासीनीकरण  पर  विलयन  क्षारीय  होता  है .


(4.) दुर्बल अम्ल तथा दुर्बल क्षार से अनुमापन (Titration of Weak Acid  and Weak Base) :-


 प्रबल  अम्ल  तथा  प्रबल  क्षार  से  अनुमापन  में  अन्तिम  बिन्दु  पर  pH  परिवर्तन  का  मान  6.8 तक  होता  है .  इस अनुमापन  में (फिनॉल रैड़) phenol red  आदि  सूचकों  का  उपयोग  किया  जाता है . उदासीनीकरण  पर  विलयन  उदासीन  रहता  है .  तथा  इसमें pH  परिवर्तन  का  मान  बहुत  धीरे - धीरे  होता  है .


 इस अध्याय के अन्य टॉपिक नीचे पढ़ें :
 Chapter :- विद्युत अपघटनी वियोजन का सिद्धान्त एवं आयनिक साम्य



Indicators सूचक क्या होते हैं In Hindi  Indicators  सूचक  क्या  होते  हैं In Hindi Reviewed by suresh kumar gautam on March 15, 2017 Rating: 5

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